सावन महीने की शिवरात्रि का पावन पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। भगवान शिव की आराधना के लिए इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा से जलाभिषेक और पूजा करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, शिवलिंग की पूजा करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना भी जरूरी माना गया है।
सबसे पहले बात फूलों की करें तो शिवलिंग पर केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित किया था। इसी तरह शिव पूजा में तुलसी दल चढ़ाना भी निषिद्ध माना जाता है।
शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर अर्पित करने से भी बचना चाहिए। इसके बजाय भस्म, चंदन और अक्षत का प्रयोग किया जाता है। वहीं, भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह साफ और बिना कटा-फटा हो तथा उसमें तीन पत्तियां हों।
जलाभिषेक के दौरान भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। मान्यता के अनुसार, तांबे के पात्र से दूध शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए। तांबे के लोटे का इस्तेमाल जल चढ़ाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित करने से भी बचने की धार्मिक परंपरा है।
शिवलिंग की परिक्रमा करते समय भी सावधानी जरूरी है। मान्यता है कि जल निकलने वाले स्थान यानी सोमसूत्र को पार नहीं करना चाहिए, इसलिए श्रद्धालु आधी परिक्रमा करते हैं।
सावन शिवरात्रि पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:22 से 5:05 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:53 बजे तक और निशिता काल रात 12:05 से 12:48 बजे तक बताया गया है।