भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग में कई प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक बदलावों की चर्चा है। इनका संबंध अंदरूनी बैठकों, ECINet सिस्टम की समीक्षा, नए मतदाताओं के पंजीकरण और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया से है। हालांकि, इन बदलावों और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर आधिकारिक आदेशों से पुष्टि करना जरूरी है।
1. चुनाव आयोग की बैठकों के नियमों में बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग की बैठकों के एजेंडे पहले साझा करने और बैठक में लिए गए फैसलों का लिखित रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों को चुनाव आयुक्तों के निर्देशों का समय पर पालन करना होगा। साथ ही, अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की अनुमति से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया गया है।
2. ECINet सिस्टम की जांच
वोटर लिस्ट से जुड़े डिजिटल सिस्टम ECINet की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की टीम बनाए जाने की जानकारी दी गई है। इसमें IIT और IIIT से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य सिस्टम की तकनीकी प्रक्रियाओं और मतदाता डेटा के प्रबंधन की जांच करना बताया गया है।
3. नए वोटरों के फॉर्म-6 में बदलाव
फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन में पहले पूछा जाने वाला एक सवाल—क्या आवेदक का नाम पुरानी मतदाता सूची में था—हटा दिया गया है। इससे नए मतदाताओं के लिए आवेदन प्रक्रिया आसान बनाने की कोशिश की गई है।
4. फॉर्म-7 के आवेदनों पर सीमा
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, एक व्यक्ति द्वारा आवेदन देने की संख्या सीमित करने का प्रावधान किया गया है। रिपोर्ट में विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 10 आवेदन और सामान्य दिनों में हर महीने 5 आवेदन की सीमा का उल्लेख है।
इसके अलावा, किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति और शिकायतकर्ता की बात सुनने तथा बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।
5. SIR के दौरान सुनवाई आसान बनाने की पहल
रिपोर्ट के मुताबिक, दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर सकते हैं और उन्हें ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था का भी उल्लेख है। कुछ परिस्थितियों में मतदाता की जगह परिवार के वयस्क सदस्य के शामिल होने की बात कही गई है।
6. छूटे हुए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान
मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गए पात्र नागरिकों की पहचान के लिए पुरानी और नई सूचियों का मिलान करने की बात कही गई है। इसके तहत BLO घर जाकर पात्र लोगों को फॉर्म-6 भरने में मदद कर सकते हैं, ताकि योग्य नागरिकों के नाम सूची में जोड़े जा सकें।
7. 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची अपडेट
रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर से 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का अभियान शुरू हुआ। इसमें 1 जनवरी 2027 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिकों को नाम जुड़वाने या विवरण में सुधार कराने का अवसर मिलने की बात कही गई है।
वोटर लिस्ट की नई समय-सीमाएं
रिपोर्ट में दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमाओं का भी उल्लेख है।
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दिल्ली: दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और उनके निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर बताई गई है।
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महाराष्ट्र: दावे और आपत्तियां 26 अक्टूबर तक, निपटारा 10 नवंबर तक और अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित होने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा, राजनीतिक दलों को ऐसी डिजिटल PDF उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिसमें मतदाताओं के नाम आसानी से खोजे जा सकें।
इन बदलावों का उद्देश्य मतदाता पंजीकरण और सूची में सुधार की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाना बताया जा रहा है। हालांकि, सभी नियमों, तारीखों और उनके लागू होने की स्थिति की पुष्टि संबंधित राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों और चुनाव आयोग के आधिकारिक आदेशों से की जानी चाहिए।