उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर वाराणसी से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए वाराणसी की रोहनिया विधानसभा सीट पर रैली आयोजित करने की तैयारी की चर्चा है। हालांकि, सपा की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
धर्मेंद्र यादव की बैठक के बाद तेज हुई चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने हाल ही में वाराणसी पहुंचकर स्थानीय नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद संभावित रैली को लेकर अटकलें तेज हो गईं। रोहनिया को कार्यक्रम के संभावित स्थल के रूप में देखा जा रहा है।
सरदार पटेल की जयंती पर सियासी संदेश देने की तैयारी?
31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई जाती है। कुर्मी समाज में पटेल का विशेष सम्मान है। ऐसे में इस दिन रोहनिया से अभियान शुरू करने की संभावित योजना को सपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, वाराणसी में होने वाली रैली का संदेश आसपास के जिलों तक पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जैसे जिलों में भी कुर्मी समुदाय की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यूपी की राजनीति में कितना अहम है कुर्मी समाज?
कुर्मी समुदाय उत्तर प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अलग-अलग राजनीतिक आकलनों में राज्य की आबादी में इसकी हिस्सेदारी करीब 4 से 5 प्रतिशत बताई जाती है। कई विधानसभा क्षेत्रों में समुदाय की संख्या स्थानीय चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर क्षेत्र और उम्मीदवार के आधार पर बदलता है।
कुर्मी समाज की मौजूदगी पूर्वांचल के अलावा अवध, रुहेलखंड और बुंदेलखंड के कई जिलों में भी है। इसी वजह से प्रमुख राजनीतिक दल इस समुदाय के समर्थन को महत्वपूर्ण मानते हैं।
सपा के लिए क्यों अहम हैं कुर्मी मतदाता?
समाजवादी पार्टी अपनी राजनीति में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लाने की रणनीति पर जोर देती रही है। ऐसे में गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं के बीच समर्थन बढ़ाना पार्टी के लिए अहम हो सकता है।
कुर्मी समाज के मतदाताओं का समर्थन भाजपा और अपना दल (एस) सहित विभिन्न दलों के साथ भी जुड़ा रहा है। वहीं, सपा में भी इस समुदाय से आने वाले नेता मौजूद हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग दल इस सामाजिक समीकरण को किस तरह साधने की कोशिश करते हैं।
पूर्वांचल पर सपा की नजर
वाराणसी की रोहनिया सीट से संभावित रैली को पूर्वांचल में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यदि कार्यक्रम तय होता है, तो इससे आसपास के जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिल सकती है। फिलहाल, रैली की तारीख, स्थान और चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत को लेकर पार्टी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।