AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की बिजली की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। ये सेंटर 24 घंटे चलते हैं और इनमें सर्वर, कूलिंग सिस्टम और नेटवर्किंग उपकरण लगातार बिजली खपत करते हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या किसी बड़े डेटा सेंटर को पूरी तरह सोलर एनर्जी से चलाया जा सकता है?
इसका जवाब है—तकनीकी तौर पर संभव है, लेकिन इसके लिए बड़े स्तर पर सोलर क्षमता और बैटरी स्टोरेज की जरूरत होगी। मान लीजिए किसी डेटा सेंटर को औसतन 10 मेगावाट बिजली लगातार चाहिए। यानी एक दिन में करीब 240 MWh ऊर्जा की जरूरत होगी।
अगर 550 वॉट के सोलर पैनल लगाए जाएं और भारत में औसतन करीब 4-5 घंटे की प्रभावी धूप मानें, तो एक पैनल रोज लगभग 2.2-2.75 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। इस हिसाब से 10 MW के डेटा सेंटर की रोजाना जरूरत पूरी करने के लिए करीब 87,000 से 1.1 लाख पैनल लग सकते हैं। वास्तविक संख्या स्थान, मौसम, पैनल की क्षमता और सिस्टम लॉस पर निर्भर करेगी।
लेकिन सिर्फ पैनल लगाना पर्याप्त नहीं है। रात और बादल वाले मौसम में बिजली उपलब्ध कराने के लिए बड़े बैटरी स्टोरेज या ग्रिड बैकअप की जरूरत होगी। साथ ही पैनलों के लिए काफी जमीन भी चाहिए होगी।
इसलिए पूरी तरह सोलर डेटा सेंटर संभव है, लेकिन इसके लिए बड़े निवेश, जमीन, स्टोरेज और मजबूत पावर मैनेजमेंट सिस्टम की जरूरत पड़ती है।