15 अगस्त 2026 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर पूरे देश की नजर रहेगी। इस बार भाषण में रोजगार, युवा, परीक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की विदेश नीति जैसे मुद्दों पर खास जोर दिए जाने की अटकलें हैं। वहीं, ज्योतिषीय गणना के आधार पर आने वाले वर्ष को लेकर भी कई तरह के संकेत बताए जा रहे हैं।
भारत की वर्ष कुंडली में सिंह लग्न के साथ चंद्रमा-केतु की स्थिति और सातवें भाव में राहु का उल्लेख किया गया है। ज्योतिषीय व्याख्या के अनुसार, ये स्थितियां सत्ता, जनता, विदेशी संबंधों और राजनीतिक टकराव से जुड़े मुद्दों को अहम बना सकती हैं।
युवा और रोजगार की बात करें तो पंचम भाव में मुंथा की स्थिति को छात्रों, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल और युवा शक्ति से जोड़ा जा रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, रोजगार के नए अवसर, स्किल डेवलपमेंट और तकनीक आधारित शिक्षा पर कोई बड़ा संदेश दे सकते हैं।
वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सीमा, आतंकवाद, रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक जैसे विषयों पर सरकार का रुख सामने आ सकता है। विदेश नीति को लेकर भी पड़ोसी देशों और बदलते वैश्विक समीकरणों का जिक्र संभव है।
हालांकि, ये ज्योतिषीय आकलन और संभावनाएं हैं, किसी सरकारी घोषणा की पुष्टि नहीं। प्रधानमंत्री वास्तव में किन मुद्दों पर फोकस करेंगे, इसका स्पष्ट जवाब 15 अगस्त के संबोधन के बाद ही मिलेगा।