बच्चों का विकास हर बच्चे में अलग गति से होता है। कुछ बच्चे जल्दी बोलना शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ को थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। लेकिन अगर बोलने में देरी के साथ आई कॉन्टैक्ट कम होना, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना या दूसरों से जुड़ने में कम रुचि जैसे संकेत भी नजर आएं, तो माता-पिता को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्चे के देर से बोलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में सुनने की क्षमता प्रभावित होने से बच्चा शब्दों को समझने और दोहराने में कठिनाई महसूस कर सकता है। वहीं, भाषा के विकास से जुड़ी अन्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।
खास तौर पर अगर बच्चा बार-बार हाथ फड़फड़ाता है, गोल-गोल घूमता है, खिलौनों के किसी एक हिस्से से ही लगातार खेलता है या तेज आवाज, रोशनी और कुछ खास चीजों को छूने पर जरूरत से ज्यादा परेशान होता है, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
अगर बच्चा आंखों में देखकर बात करने से बचता है, नाम बुलाने पर प्रतिक्रिया नहीं देता या सामाजिक संपर्क में कम रुचि दिखाता है, तो इसे सिर्फ शर्मीलापन मानकर टालना ठीक नहीं।
ऐसे संकेत लगातार दिखाई दें तो बाल रोग विशेषज्ञ या विकास विशेषज्ञ से समय पर सलाह लें। शुरुआती पहचान और सही मार्गदर्शन बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।