BRICS समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ दुनिया के बड़े संकटों की सबसे आगे की कतार में खड़ा है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अब भी सीमित है। पीएम मोदी ने मौजूदा ग्लोबल गवर्नेंस सिस्टम की तुलना एक पिरामिड से करते हुए कहा कि इसकी ऊपरी परत में फैसले लेने की शक्ति केंद्रित है, जबकि निचले स्तर पर वे देश हैं, जो इन फैसलों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि इस व्यवस्था को ‘प्रिविलेज’ से ‘पार्टनरशिप’ के प्लेटफॉर्म में बदलने की जरूरत है, जहां हर देश की आवाज सुनी जाए और सभी की भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने ग्लोबल साउथ को नियमों का पालन करने वाले देशों से आगे बढ़ाकर नियम बनाने में भागीदार बनाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने BRICS के अगले 20 वर्षों के रोडमैप की भी बात की। उन्होंने कहा कि संगठन को अपनी एकता और सहमति को ठोस परिणामों में बदलना होगा। साथ ही, अध्यक्षता हर साल बदलने के बावजूद BRICS की संस्थागत गति नहीं रुकनी चाहिए। पीएम का संदेश साफ था—BRICS को ऐसी वैश्विक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जहां फैसले कुछ देशों तक सीमित न रहें।