दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार की तारीफ की है। उन्होंने BRICS के साझा घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इतने अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच बिना किसी बड़े मतभेद के संयुक्त बयान जारी होना सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है।
कपिल सिब्बल ने कहा कि BRICS में शामिल देशों के बीच कई तरह के राजनीतिक, सीमा और रणनीतिक मतभेद हैं। ऐसे में किसी एक देश या मुद्दे के पक्ष में स्पष्ट रुख लेना मुश्किल होता है। उन्होंने ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव, वहीं सऊदी अरब और UAE के अमेरिका के साथ संबंधों का भी जिक्र किया। सिब्बल के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में सभी देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि BRICS के भीतर सीमा विवादों को उठाना भी व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि ये द्विपक्षीय मुद्दे होते हैं। उनके मुताबिक, देशों का यह मिला-जुला समूह किसी क्रांतिकारी या बहुत ठोस साझा प्रस्ताव तक आसानी से नहीं पहुंच सकता। इसलिए बिना विवाद के संयुक्त घोषणा पर सहमति बनना अपने आप में महत्वपूर्ण है।
सिब्बल ने BRICS के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन से हुई थी, जबकि 2011 में दक्षिण अफ्रीका इसके साथ जुड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि 2012 की BRICS बैठक के दौरान UPA सरकार के समय न्यू डेवलपमेंट बैंक का प्रस्ताव सामने आया था और इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का योगदान रहा था।