भारत में हो रहे BRICS Summit 2026 को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है। इस बीच अमेरिकी मीडिया में BRICS की एकजुटता और उसके बढ़ते प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। The New York Times ने सम्मेलन से पहले अपने विश्लेषण में BRICS देशों के बीच मौजूद मतभेदों को प्रमुखता दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, BRICS के कई सदस्य देश पश्चिमी संस्थानों और अमेरिका-केंद्रित वैश्विक व्यवस्था पर निर्भरता कम करने की इच्छा रखते हैं। लेकिन अलग-अलग देशों के बीच चल रहे संघर्ष और उनके अलग-अलग रणनीतिक हित इस समूह की एकता के लिए चुनौती बन रहे हैं।
ईरान के मुद्दे को भी इसी संदर्भ में उठाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद खुद को अलग-थलग नहीं दिखाना चाहता, जबकि युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियां ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। दूसरी ओर, BRICS के कई सदस्य देशों की प्राथमिकता स्थिर और सस्ती ऊर्जा आपूर्ति है।
भारत के लिए भी यह सम्मेलन कूटनीतिक संतुलन की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत चीन को अपना प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानता रहा है, लेकिन BRICS के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहते हुए उसे चीन के साथ भी सहयोग की राह तलाशनी पड़ती है।
यही वजह है कि BRICS Summit 2026 सिर्फ आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक शक्ति व्यवस्था और भारत की रणनीतिक भूमिका के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।