NLSIU के दीक्षांत समारोह में अनिश्चितता का किया जिक्र
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार, 17 अक्टूबर को नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी ताकतों की वजह से पैदा हुए अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण हालात ने अनिश्चितता पैदा कर दी थी। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि समारोह उम्मीद के मुताबिक आयोजित नहीं हो पाएगा।
हालांकि, अपने बयान में CJI ने बाहरी ताकतों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। उन्होंने समारोह में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को बधाई दी और कहा कि देश को उनसे काफी उम्मीदें हैं।
‘कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं’
CJI सूर्यकांत ने युवा ग्रेजुएट्स को संबोधित करते हुए कहा कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। उन्होंने छात्रों से सही का पक्ष लेने का साहस रखने और दूसरों की बात सुनने में विनम्रता बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने सलाह दी कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुना जाना चाहिए। साथ ही, किसी व्यक्ति को उसके पद से अलग करके देखना और असहमति जताते समय उसकी गरिमा का सम्मान करना भी जरूरी है।
युवा वकीलों को मूल्यों से समझौता न करने की सलाह
CJI ने कहा कि कानून कोई स्थिर व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसे कानूनी पेशे से जुड़े लोगों की सोच और काम प्रभावित करते हैं। उनके मुताबिक, कानूनी शिक्षा का दायरा केवल कानूनों और संवैधानिक सिद्धांतों को पढ़ने तक सीमित नहीं है। अलग-अलग पृष्ठभूमि और विचारों वाले लोगों से संवाद करना भी इसका अहम हिस्सा है।
युवा वकीलों को उन्होंने सुविधा के लिए अपने मूल्यों से समझौता करने और शॉर्टकट अपनाने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कानूनी पेशे को लोगों की सेवा करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की जिम्मेदारी बताया।
समारोह के दौरान CJI ने एक दिवंगत लॉ ग्रेजुएट को श्रद्धांजलि दी और छात्रों की सफलता में माता-पिता, शिक्षकों तथा संस्थान के कर्मचारियों के योगदान की सराहना की।