सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत से मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायपालिका को लेकर दिए गए उनके बयानों पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ी विपक्षी नेताओं की याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत ने संकेत दिया कि संबंधित याचिकाकर्ता की याचिका पर आगे की सुनवाई उनके स्पष्टीकरण के अधीन रहेगी।
संजय राउत से क्यों मांगा गया स्पष्टीकरण?
रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस याचिका में संजय राउत छठे याचिकाकर्ता हैं।
मामले के दौरान राउत के मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका को लेकर दिए गए बयानों का मुद्दा उठा। इसके बाद अदालत ने उनसे अपने आचरण को लेकर सफाई देने को कहा। याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।
SCBA ने भी की आपराधिक अवमानना की मांग
इस मामले से अलग, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। यह मांग न्यायपालिका और मुख्य न्यायाधीश को लेकर की गई कथित टिप्पणियों से संबंधित है।
SCBA का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग और अदालत की ओर से किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाना अलग-अलग बातें हैं।
संजय राउत ने न्यायपालिका पर क्या आरोप लगाए?
रिपोर्टों के अनुसार, संजय राउत ने आरोप लगाया था कि न्यायाधीश भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और मुख्यमंत्री न्यायाधीशों के लिए रात्रिभोज आयोजित करते हैं। उन्होंने न्यायाधीशों के भाजपा नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलने से जुड़ी तस्वीरों का भी जिक्र किया था।
दूसरी ओर, अटॉर्नी जनरल के हवाले से बताया गया कि संबंधित तस्वीरें लंदन की नहीं, बल्कि नवंबर 2025 में दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम की थीं।
फिलहाल मामले में अदालत के सामने राउत के बयानों, उनके स्पष्टीकरण और अवमानना से जुड़ी अलग कार्यवाही के मुद्दे हैं। आगे की सुनवाई में इन पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।