CJP की फंडिंग पर RTI से सवाल, प्रवक्ता का पलटवार- 'मोदी जी माफ कर देंगे, चिंता न करें'
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की फंडिंग और संस्थापक अभिजीत दीपके की पढ़ाई के खर्च को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI एक्टिविस्ट ने अभिजीत दीपके और CJP से जुड़े फंड की जांच की मांग की है। इसके बाद CJP की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
RTI एक्टिविस्ट ने अभिजीत दीपके के पिता की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। दीपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी बताए जा रहे हैं। एक्टिविस्ट ने यह सवाल भी उठाया कि दीपके की विदेश में पढ़ाई का खर्च किस तरह वहन किया गया।
हालांकि, अभिजीत दीपके ने इन सवालों पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी पढ़ाई का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी से मिली स्कॉलरशिप से पूरा हुआ था। इसके अलावा उन्होंने कुछ एजुकेशन लोन भी लिया था, जिसे अब वह चुका चुके हैं।
CJP की फंडिंग पर भी उठे सवाल
RTI एक्टिविस्ट ने CJP की फंडिंग को लेकर भी जांच की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन के लिए करीब 1 करोड़ रुपये की फंडिंग का जिक्र सामने आया है। एक्टिविस्ट ने सवाल उठाया कि अगर CJP को राजनीतिक गतिविधियों के लिए फंड मिल रहा है, तो इसकी वैधानिक स्थिति और फंडिंग की जांच होनी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने CJP की फंडिंग को लेकर कहा कि संगठन क्राउडफंडिंग के जरिए पैसा जुटाता है और फंडिंग में पारदर्शिता बरतने का दावा किया।
PM CARES Fund का जिक्र कर CJP का तंज
मामले पर CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौड़ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए RTI एक्टिविस्ट पर पलटवार किया। उन्होंने PM CARES Fund का जिक्र करते हुए लिखा, 'एक प्राइवेट इंडिविजुअल के पढ़ाई खर्च पर आरटीआई लगाने वाले कभी पीएम केयर्स फंड को भी देखें. मोदी जी आपको माफ कर देंगे, चिंता न करें.'
RTI एक्टिविस्ट ने निर्वाचन आयोग से जांच की मांग की
PTI के मुताबिक, सूरत के RTI कार्यकर्ता ने CJP की कानूनी स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि CJP एक गैर-पंजीकृत संगठन है, लेकिन राजनीतिक दल की तरह काम कर रहा है।
उन्होंने मांग की है कि अगर संगठन को राजनीतिक गतिविधियों के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई है, तो निर्वाचन आयोग को यह जांच करनी चाहिए कि CJP जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है या नहीं।
फिलहाल, CJP की फंडिंग, अभिजीत दीपके की विदेश में पढ़ाई और संगठन की कानूनी स्थिति को लेकर उठे सवालों पर विवाद जारी है। मामले में संबंधित संस्थाओं की ओर से आधिकारिक जांच या जवाब सामने आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।