CJP छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और हिंसा की जांच के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमेटी में बदलाव की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा गठित समिति के किसी सदस्य को बिना ठोस आधार के पक्षपाती मानकर नहीं चला जा सकता।
यह पांच सदस्यीय समिति पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में काम कर रही है। इसका गठन जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा की जांच के लिए किया गया है।
सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण और अन्य पक्षों ने समिति के एक पूर्व डीजीपी सदस्य को लेकर संभावित हितों के टकराव की आशंका जताई थी। उनका तर्क था कि संबंधित सदस्य की कुछ अधिकारियों से नजदीकी जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समिति को दोबारा गठित करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह न्यायालय की निगरानी में काम कर रही है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समिति का काम आरोपों की जांच करना, प्रभावित लोगों की पहचान करना और अपनी सिफारिशें देना है। किसी आपराधिक जांच या FIR का आदेश देने का अधिकार समिति के पास नहीं होगा। ऐसा फैसला सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा।
अब समिति को अपना काम जारी रखने और अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने रखने का रास्ता साफ हो गया है।