अगर आप गांव में रहते हैं और गोबर, पराली या कृषि से निकलने वाले जैविक कचरे से कमाई का नया जरिया तलाश रहे हैं, तो GOBARdhan योजना आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। केंद्र सरकार ने योजना के तहत CBG और बायोगैस से जुड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाएं की हैं।
1. CBG प्लांट लगाने पर आर्थिक सहायता
नए CBG प्लांट लगाने वाले पात्र प्रोजेक्ट्स को उनकी क्षमता के आधार पर पूंजीगत सहायता मिल सकती है। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए पात्र क्षमता पर 1.25 करोड़ रुपये प्रति टन प्रतिदिन (TPD) तक सहायता का प्रावधान है। एक परियोजना के लिए अधिकतम सहायता 30 करोड़ रुपये तक हो सकती है। कुछ मौजूदा प्लांट के अपग्रेडेशन के लिए भी सहायता का प्रावधान है।
2. तैयार CBG की बिक्री के लिए बाजार
प्लांट लगाने वालों के लिए गैस की बिक्री एक बड़ी चिंता होती है। योजना के तहत उपलब्ध CBG की 100% तक खरीद के लिए व्यवस्था का विकल्प रखा गया है। उत्पादित गैस को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क या चिन्हित CBG क्लस्टर के जरिए बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।
3. कीमत पर लंबे समय तक सपोर्ट
CBG के लिए शुरुआती प्रशासित कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBTU रखी गई है। 95% मीथेन कंटेंट के आधार पर यह करीब 98 रुपये प्रति किलो के बराबर बैठती है। यह व्यवस्था कम से कम 31 मार्च 2036 तक लागू रहने का प्रावधान है। खरीदे गए CBG पर 10 रुपये प्रति किलो तक अफोर्डेबिलिटी सपोर्ट भी दिया जा सकता है।
4. किसानों के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता
योजना में गोबर, पराली और कृषि अवशेष जैसे जैविक कचरे का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर है। किसान और पशुपालक इन संसाधनों को CBG प्लांट तक पहुंचाकर अतिरिक्त आमदनी का अवसर पा सकते हैं। प्लांट से जैविक खाद भी तैयार की जा सकती है।
5. प्लांट लगाने के लिए क्या करना होगा?
CBG प्रोजेक्ट लगाने वाले आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। परियोजना के लिए जमीन, पानी, बिजली और कच्चे माल की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद DPR, तकनीकी जांच और जरूरी मंजूरियों के आधार पर पात्र परियोजनाओं को सहायता दी जाएगी।
इस योजना का उद्देश्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है।