भारत में रोजगार की स्थिति को लेकर सितंबर 2026 के आंकड़ों में महिलाओं, खासकर शहरी महिलाओं के लिए चिंता के संकेत सामने आए हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के मुताबिक, देश की कुल बेरोजगारी दर 5% पर स्थिर रही, लेकिन महिलाओं की बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
महिलाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2% हुई
सितंबर में महिलाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.2% हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.1% थी। ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर 3.9% पर स्थिर रही। वहीं, शहरी महिलाओं के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण रही और उनकी बेरोजगारी दर अगस्त के 8.9% से बढ़कर सितंबर में 9.2% पहुंच गई।
ये आंकड़े शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों की ओर संकेत करते हैं।
श्रम बल भागीदारी दर में मामूली गिरावट
सितंबर में देश की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 55.5% रही, जो अगस्त के 55.6% से थोड़ी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 50.4% से बढ़कर 50.7% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में 58.2% से घटकर 58% दर्ज की गई।
LFPR बताती है कि 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र की आबादी में कितने लोग काम कर रहे हैं या रोजगार की तलाश में हैं।
कामगारों के अनुपात में भी बदलाव
कामगार जनसंख्या अनुपात (WPR) अगस्त के 52.8% से घटकर सितंबर में 52.7% रह गया। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 55.8% से गिरकर 55.5% हुआ, जबकि शहरी क्षेत्रों में 47% से बढ़कर 47.2% दर्ज किया गया।
पुरुषों की बेरोजगारी दर में क्या हुआ?
सितंबर में पुरुषों की कुल बेरोजगारी दर 4.9% पर स्थिर रही। शहरी पुरुषों में यह अगस्त के 6.1% से घटकर 6% हो गई, जबकि ग्रामीण पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.3% से बढ़कर 4.4% दर्ज की गई।
कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि देश की बेरोजगारी दर स्थिर रहने के बावजूद महिलाओं, विशेषकर शहरी महिलाओं के रोजगार की स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत है। आने वाले महीनों के आंकड़े बताएंगे कि श्रम बाजार में यह रुझान किस दिशा में आगे बढ़ता है।