अमेरिका और इजराइल के ईरान पर सैन्य हमलों के छह महीने बाद भी संघर्ष खत्म होने का कोई साफ रास्ता नजर नहीं आ रहा है। जिस सैन्य अभियान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में छोटी अवधि का बताया था, वह अब अमेरिकी राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।
ईरान को सैन्य नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन उसने आत्मसमर्पण नहीं किया है। वहीं होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ी है।
इस युद्ध की राजनीतिक कीमत भी ट्रंप को चुकानी पड़ रही है। रिपोर्ट में दिए गए Reuters/Ipsos पोल के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 40 फीसदी से घटकर 33 फीसदी रह गई है। महंगे ईंधन और बढ़ती महंगाई अमेरिकी मतदाताओं के लिए बड़ा मुद्दा बन रहे हैं।
उधर, युद्ध ने अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर भी दबाव बढ़ाया है। बड़ी संख्या में मिसाइलों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर के इस्तेमाल ने अमेरिकी भंडार को प्रभावित किया है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भी नुकसान पहुंचा है, लेकिन IAEA के निरीक्षण में अनिश्चितता और संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं। ऐसे में ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—ईरान पर दबाव बनाए रखते हुए इस लंबे संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाशना।