नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों पर रोक लगाने के उद्देश्य से 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किया गया। सदन ने विधेयक पेश करने की अनुमति दे दी, लेकिन इस दौरान विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित रही।
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वह हंगामा छोड़कर इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में हिस्सा ले और इसे पारित कराने में सहयोग करे। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए यह कानून लाई है और चाहती है कि इस पर व्यापक चर्चा हो।
विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर रिजिजू ने कहा कि यह मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल विधेयक पर चर्चा और इसे पारित कराना है।
रिजिजू ने यह भी कहा कि जो सांसद सदन में चर्चा नहीं होने देना चाहते, उनके खिलाफ लोकसभा के नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालने वालों पर स्पीकर आवश्यक निर्णय ले सकते हैं।
वहीं, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा विधेयक पेश किए जाने के कुछ ही मिनट बाद विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी सांसद इस पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय सदन में व्यवधान पैदा कर रहा है।
अब इस विधेयक पर आगे की चर्चा और इसके पारित होने पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि यह कानून लागू होता है, तो पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ और अधिक सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।