देश में बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। खरगे ने रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले वर्षों में आम आदमी के घरेलू बजट पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए और महंगाई से राहत के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मई 2013 और अगस्त 2026 में कई जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों की तुलना पेश की। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में टमाटर, प्याज, आटा, सरसों का तेल और कई दालों की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब जनता महंगाई जैसे मुद्दों पर सवाल करती है तो सरकार का ध्यान दूसरे मुद्दों की तरफ मोड़ने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महंगाई के सवाल को लगातार उठाती रहेगी।
टमाटर के दाम में सबसे ज्यादा उछाल का दावा
खरगे द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मई 2013 में टमाटर की कीमत करीब 17.50 रुपये प्रति किलो थी, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। उनके अनुसार, इस दौरान टमाटर की कीमत में करीब 585 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
इसी तरह प्याज की कीमत 23 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 73 रुपये और आटा 21 रुपये से बढ़कर 69 रुपये प्रति किलो होने का दावा किया गया है। खरगे ने इन कीमतों के आधार पर प्याज में करीब 217 फीसदी और आटे में 228 फीसदी की वृद्धि बताई है।
सरसों तेल और दालों की कीमतों का भी जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरसों के तेल की कीमत को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, मई 2013 में सरसों का तेल करीब 102 रुपये प्रति लीटर था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 263 रुपये तक पहुंच गया। इस आधार पर उन्होंने करीब 157 फीसदी की बढ़ोतरी का दावा किया है।
दालों की कीमतों में भी वृद्धि का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि तुअर, उड़द और चना जैसी प्रमुख दालों की कीमतों में करीब 140 से 153 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि इन आवश्यक वस्तुओं के महंगे होने का सीधा असर मध्यम वर्ग और आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है।
‘महंगाई पर जवाब दे सरकार’
खरगे ने अपने बयान में कहा कि महंगाई केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से है। उनका कहना है कि जब खाने-पीने की जरूरी चीजें लगातार महंगी होती हैं तो परिवारों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ती है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से महंगाई के मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई के सवाल से बचने के लिए दूसरे मुद्दों को आगे करती है। खरगे के मुताबिक, जनता को राजनीतिक दावों के बजाय वास्तविक राहत की जरूरत है।
आंकड़ों को लेकर सियासी बहस तेज
मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के बाद महंगाई को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो सकती है। कांग्रेस जहां इन आंकड़ों को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर हमला कर रही है, वहीं महंगाई के आंकड़ों की तुलना में इस्तेमाल किए गए स्रोत और अलग-अलग समय की कीमतों को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच बहस की संभावना है।
हालांकि, खरगे का मुख्य फोकस घरेलू बजट पर पड़ रहे असर पर है। उनका कहना है कि सरकार को आम लोगों की आय और खर्च के बीच बढ़ते अंतर को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनानी चाहिए।
महंगाई का मुद्दा आने वाले समय में विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है। टमाटर, प्याज, तेल, आटा और दाल जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें सीधे आम परिवारों की रसोई से जुड़ी हैं। ऐसे में इनकी कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव राजनीतिक बहस को भी प्रभावित करता है।