पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर पार्टी की अंदरूनी स्थिति चर्चा में है। 25 सितंबर को चंडीगढ़ में हुए कांग्रेस के रोष मार्च में कई वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की गैरमौजूदगी ने पार्टी में मतभेद की चर्चाओं को फिर हवा दे दी।
रोष मार्च की अगुवाई प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट को करनी थी, लेकिन दिल्ली में व्यस्तता के चलते वह चंडीगढ़ नहीं पहुंच सके। इसके बाद चन्नी भी कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए। विधायक सुखपाल सिंह खैहरा भी मार्च से दूर रहे। चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच मतभेद की चर्चाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
वड़िंग ने दिया एकजुटता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान राजा वड़िंग ने वरिष्ठ नेताओं के सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह अपने वरिष्ठों से सीखते हैं और उनका सम्मान करते हैं। उनके बयान को पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी कम करने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
वहीं पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि तबीयत खराब होने के बावजूद वह कार्यक्रम में पहुंचे, क्योंकि उनकी गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हो सकती थीं।
विधायक परगट सिंह ने भी कहा कि कांग्रेस में सभी नेता एकजुट हैं। उन्होंने माना कि पहले मतभेद रहे हैं, लेकिन अब पार्टी का लक्ष्य पंजाब से जुड़े मुद्दों पर मिलकर संघर्ष करना है। इसके बाद वड़िंग ने मंच से ही परगट सिंह को रोष मार्च की अगुवाई करने के लिए कहा।
पार्टी नेतृत्व की इन कोशिशों के बावजूद चन्नी समेत कुछ प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी ने पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को फिर चर्चा में ला दिया है।