कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के 1980 की मतदाता सूची में नाम शामिल होने से जुड़े मामले में दिल्ली की अदालत ने अहम आदेश दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर जांच से इनकार किया गया था। कोर्ट ने मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट के पास भेजते हुए नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
यह मामला उस शिकायत से जुड़ा है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में उस समय शामिल था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को हासिल की थी। शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया की जांच और FIR दर्ज करने की मांग की थी। ये आरोप फिलहाल शिकायत में लगाए गए दावे हैं, अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि पहले मजिस्ट्रेट के आदेश में पर्याप्त कारण दर्ज नहीं किए गए थे। अदालत के मुताबिक पुलिस अधिकारी की दलील नहीं सुनी गई और पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट भी नहीं मांगी गई। इसी प्रक्रिया संबंधी कमी के आधार पर मामले को फिर से सुनवाई के लिए भेजा गया है।
अब मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी। उस दौरान मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता और पुलिस का पक्ष सुनकर नए सिरे से निर्णय करेंगे कि FIR दर्ज करने या कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।
इस बीच बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मामले को लेकर राहुल गांधी से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, अदालत के मौजूदा आदेश का मतलब यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं; फिलहाल मामला दोबारा न्यायिक विचार के लिए खुला है।