बिहार के सीवान में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से AK-47 असॉल्ट राइफल से फायरिंग किए जाने के मामले ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के बाद एसआईटी के जवान अभिषेक पटेल को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी और किन परिस्थितियों में यह फैसला लिया गया।
जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए थे। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारी पत्थरबाजी कर रहे थे, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जवान का उद्देश्य भीड़ को हटाना था, न कि किसी को निशाना बनाना।
घटना में तीन लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि घायलों को AK-47 की गोली नहीं लगी। मौके पर अन्य स्थानों से भी फायरिंग होने की बात सामने आई है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि घायल पुलिस की गोली से हुए या उपद्रवियों की ओर से हुई फायरिंग में।
नियमों पर उठे सवाल
पुलिस नियमों के अनुसार, लाठीचार्ज से लेकर फायरिंग तक के लिए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति आवश्यक होती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब घटना के समय डीएम और एसपी मौके पर मौजूद थे, तो क्या उनकी अनुमति से AK-47 का इस्तेमाल किया गया था या नहीं। फिलहाल इस पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
AK-47 के इस्तेमाल पर क्या है नियम?
AK-47 एक असॉल्ट राइफल है, जिसका उपयोग सामान्य भीड़ नियंत्रण के बजाय विशेष सुरक्षा और गंभीर ऑपरेशन में किया जाता है। बिहार सरकार ने वर्ष 2018 में जारी आदेश के तहत वीआईपी सुरक्षा में तैनात अधिकांश पुलिसकर्मियों के लिए AK-47 लेकर चलने पर प्रतिबंध लगाया था। केवल राज्यपाल और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में लगे विशेष सुरक्षा कर्मियों को ही इसकी अनुमति है।
सीवान में क्या हैं हालात?
घटना के बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। प्रदर्शन के दौरान करीब 30 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें जिले के एसपी और नगर थाना प्रभारी भी शामिल हैं। फिलहाल पूरे सीवान में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा
घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फायरिंग का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शन पर AK-47 का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में संबंधित एसपी और वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई तथा गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्र प्रदर्शन जैसे हालात में AK-47 जैसी असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल किसके आदेश पर किया गया और क्या यह कार्रवाई पुलिस मैनुअल के अनुरूप थी। इन सवालों के जवाब आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।