दिल्ली में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने का मुद्दा नया नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी दिल्ली में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर उनकी पार्टी ने अभियान चलाया था।
भारद्वाज ने मौजूदा विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अब मतदाता सूची से जुड़े काम के कंप्यूटरीकरण के कारण मामला ज्यादा चर्चा में आया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब दिल्ली में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट रोल में करीब 47.6 लाख नाम शामिल नहीं थे। वहीं 33 लाख से अधिक मतदाताओं को डेटा में विसंगतियों को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं।
इसी बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इस रिपोर्ट के बाद कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।
इस पूरे विवाद के बीच SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।