टाटा समूह में नेतृत्व और बोर्ड से जुड़े विवाद के बीच RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने भारतीय पारिवारिक कारोबारों में बढ़ती चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि टाटा समूह के घटनाक्रम के बाद कुछ कारोबारी घराने अपनी कंपनियों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की संख्या और भूमिका की समीक्षा करने पर विचार कर सकते हैं।
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए टाटा समूह के विवाद को पारिवारिक कारोबारों के लिए चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक, एक बड़े कारोबारी समूह ने अपनी कंपनियों के बोर्ड की स्थिति की समीक्षा के लिए कानूनी टीम से सलाह ली है। इसमें स्वतंत्र निदेशकों की संख्या और उनकी भूमिका पर भी विचार किया जा रहा है।
गोयनका ने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि कंपनियों में बेहतर संचालन और मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए, न कि उनकी संख्या घटाई जानी चाहिए।
क्या है टाटा समूह का विवाद?
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा समूह में विवाद की चर्चा टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को अगले पांच साल के लिए बढ़ाने के प्रस्ताव के बाद तेज हुई। बताया गया है कि 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने उनके दोबारा नियुक्त होने को मंजूरी दी थी, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।
इसके बाद समूह के भीतर नेतृत्व, नियंत्रण और फैसले लेने के अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
स्वतंत्र निदेशक क्यों होते हैं अहम?
स्वतंत्र निदेशक कंपनी के प्रबंधन से स्वतंत्र रहकर बोर्ड के फैसलों की समीक्षा करने और शेयरधारकों के हितों की रक्षा करने में भूमिका निभाते हैं। वे पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
हर्ष गोयनका की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब टाटा समूह के घटनाक्रम ने बड़े कारोबारी घरानों में बोर्ड की संरचना और स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका को लेकर बहस को फिर से चर्चा में ला दिया है।