दवाओं की कीमतों और मरीजों से वसूले जाने वाले भारी मुनाफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। 29 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने उस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई, जहां किसी दवा की कीमत खुदरा विक्रेता के लिए करीब 2,700 रुपये हो, लेकिन मरीज से 27,000 रुपये तक वसूले जाएं।
भारत में आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) नियंत्रण रखती है। शेड्यूल्ड दवाओं के लिए 16 प्रतिशत खुदरा मार्जिन का प्रावधान है। वहीं, नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं की शुरुआती कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं और उन पर सीधे मार्जिन सीमा लागू नहीं होती।
यही अंतर अब बहस के केंद्र में है। संसदीय समिति की रिपोर्टों में कुछ दवाओं की सप्लाई कीमत और MRP के बीच बेहद बड़ा अंतर सामने आया है। अस्पतालों द्वारा मरीजों को अपनी फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए मजबूर किए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने आया।
केंद्र ने मामले पर समाधान तलाशने की बात कही है। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। हालांकि, फिलहाल किसी नई मूल्य-सीमा का आदेश नहीं हुआ है।