उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पश्चिमी यूपी में बीजेपी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया है, जबकि समाजवादी पार्टी ने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर फोकस किया है। दोनों दलों की गतिविधियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
बीजेपी का पश्चिमी यूपी पर फोकस
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के मेरठ दौरे के दौरान पश्चिमी क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। पार्टी ने हर बूथ की समीक्षा, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करने और मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसी कार्यक्रम में विपक्ष और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर तीखे राजनीतिक बयान दिए।
योगी ने मेरठ में कहा कि “बाबर के अनुयायियों को बजरंगी के भक्त ही जवाब दे सकते हैं।” उनका यह बयान सियासी बहस का हिस्सा बन गया है।
अखिलेश का ‘27 हजार’ फॉर्मूला
दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने पार्टी संगठन को हर विधानसभा क्षेत्र में अतिरिक्त 27 हजार वोट जोड़ने या बीजेपी के वोट में इतनी कमी लाने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए घर-घर संपर्क, बूथ स्तर पर संगठन और PDA रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। अखिलेश 24 सितंबर को PDA रथ के जरिए रायबरेली जाने वाले हैं।
इमरान मसूद और इकरा हसन के बयान
पश्चिमी यूपी में कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे को लेकर भी चर्चा तेज है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 2027 के लिए गठबंधन को जल्द अंतिम रूप देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण है।
वहीं, सपा सांसद इकरा हसन ने हालिया कार्यक्रम में PDA को पार्टी की ताकत बताते हुए 2027 में सपा सरकार बनने की बात कही।
इस तरह यूपी की चुनावी राजनीति में फिलहाल संगठन, बूथ मैनेजमेंट, PDA सामाजिक समीकरण, गठबंधन और सांस्कृतिक मुद्दे प्रमुख चर्चा के विषय बने हुए हैं। हालांकि 2027 के चुनाव का अंतिम राजनीतिक परिणाम अभी भविष्य की बात है और मौजूदा बयानबाजी को चुनावी तैयारियों के तौर पर ही देखा जा रहा है।