उत्तर प्रदेश के बंटवारे की पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में है। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने देवरिया में आयोजित एक रैली में दावा किया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अलग पूर्वांचल राज्य बनने पर वहां का पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होना चाहिए।
राजभर ने चार संभावित राज्यों के तौर पर पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश का जिक्र किया। उन्होंने 27 फीसदी OBC आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि आरक्षण का लाभ अलग-अलग पिछड़ी जातियों को उनकी आबादी के अनुपात में मिलना चाहिए।
क्या यह पहली बार उठी है UP बांटने की मांग?
उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में बांटने का मुद्दा नया नहीं है। नवंबर 2011 में तत्कालीन मायावती सरकार ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश को पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिमी प्रदेश में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, लेकिन आगे राज्य गठन नहीं हुआ। केंद्र सरकार ने 2014 में संसद में बताया था कि उस समय यूपी से नए राज्य बनाने का कोई प्रस्ताव उसके विचाराधीन नहीं था।
राजभर के बयान का राजनीतिक संदर्भ
राजभर का ताजा बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आया है। पूर्वांचल में उनकी पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां लंबे समय से केंद्रित रही हैं। उन्होंने अलग राज्य की मांग के साथ OBC आरक्षण में हिस्सेदारी का मुद्दा भी उठाया है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश का विभाजन केवल किसी नेता के बयान से नहीं हो सकता। नए राज्य के गठन के लिए संवैधानिक प्रक्रिया अपनानी होगी। केंद्र सरकार ने पहले भी कहा है कि नए राज्यों के गठन के व्यापक प्रभावों को देखते हुए विभिन्न पहलुओं और संबंधित राज्य में व्यापक सहमति पर विचार किया जाता है।
फिलहाल राजभर का बयान एक राजनीतिक मांग और प्रस्ताव के रूप में सामने आया है। इसे राज्य के वास्तविक विभाजन की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।