संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि दुनिया के बड़े विवादों से निपटने के लिए मौजूदा सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित टकराव को भी इसका एक उदाहरण बताया।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की उपयोगिता को मानता है, लेकिन उनके मुताबिक मौजूदा व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य और अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ गई है। उन्होंने थाईलैंड-कंबोडिया विवाद, भारत-पाकिस्तान तनाव और अन्य वैश्विक संकटों का जिक्र करते हुए कहा कि एक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय तंत्र इन परिस्थितियों से निपटने में मदद कर सकता था।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाएं प्रभावी नहीं होतीं, तब देश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका अपने राष्ट्रीय हित को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से ऊपर रखेगा।
रुबियो का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए युद्धविराम में अमेरिकी भूमिका का फिर दावा किया है। वहीं भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद बनी थी और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी।