एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर जारी बहस में अब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी अपना पक्ष रखा है। कंपनी ने कहा है कि वह भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है, लेकिन सभी कंपनियों को देश के कानूनों और नीतियों का पालन करना होगा।
मस्क ने अंबानी पर लगाए थे आरोप
एलन मस्क ने 8 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाया था कि 165 से अधिक देशों में लाइसेंस हासिल कर चुकी स्टारलिंक को भारत में अंतिम व्यावसायिक मंजूरी मिलने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ उद्योगपति भारत में अपनी बाजार हिस्सेदारी और एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की एंट्री में बाधा डाल रहे हैं।
मस्क ने यह भी सवाल किया था कि क्या मुकेश अंबानी भारत में इतने प्रभावशाली हैं कि स्टारलिंक की एंट्री प्रभावित हो रही है।
दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने का दावा
स्टारलिंक का कहना है कि उसकी सैटेलाइट तकनीक उन गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकती है, जहां फाइबर नेटवर्क या मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना मुश्किल है। कंपनी ने भारत में 20 गेटवे साइट तैयार करने की बात भी कही है।
हालांकि, सेवा शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियों और स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर प्रक्रिया पूरी होना बाकी बताया गया है।
रिलायंस ने क्या कहा?
16 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया कि वह स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है। साथ ही कंपनी ने जोर दिया कि जियो हो या कोई अन्य ऑपरेटर, सभी को भारत के लागू कानूनों और नीतियों के अनुरूप काम करना होगा।
इस बयान के बाद बहस का केंद्र अब स्टारलिंक की भारत में एंट्री, नियामकीय मंजूरियों और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा पर है।