अयोध्या में रामलला के दर्शन करने पहुंची एक महिला श्रद्धालु का 4 करोड़ रुपये का चेक चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेन्नई/कोयंबटूर से आई एस. नाग लक्ष्मी ने मंदिर के लिए 10 हजार रुपये और मंदिर कर्मचारियों की सुविधाओं के लिए 4 करोड़ रुपये का चेक दान में दिया था। लेकिन शुरुआती जांच में कथित तौर पर सामने आया कि उनके बैंक खाते में इतनी बड़ी रकम मौजूद नहीं है।
अब सवाल है कि अगर चेक वास्तव में बाउंस होता है तो महिला के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है? बैंक में पर्याप्त रकम नहीं होने पर चेक लौटने की स्थिति में Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 लागू हो सकती है। इसमें कानूनी नोटिस और भुगतान की मांग की प्रक्रिया होती है। दोष सिद्ध होने पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा चेक बैंक में जमा करने के बाद उसका आधिकारिक रूप से क्या परिणाम आया। इसलिए फिलहाल इसे संभावित चेक बाउंस का मामला ही माना जा रहा है।
ध्यान रहे, केवल चेक बाउंस होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है।