Starlink India: भारत में Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू होने से पहले एलन मस्क के एक बयान ने विवाद बढ़ा दिया है। मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ 'ओलिगार्क्स' स्टारलिंक को भारत में लॉन्च होने से रोक रहे हैं, ताकि टेलीकॉम बाजार पर अपना दबदबा बनाए रख सकें। अब भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देश का सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेटरी सिस्टम निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है।
सरकार ने कहा- सभी कंपनियों पर एक जैसे नियम
संचार मंत्रालय के मुताबिक, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए सभी कंपनियों पर समान नियम लागू हैं। सरकार ने बताया कि Starlink, Eutelsat OneWeb और Jio Satellite Communications को लाइसेंस मिल चुके हैं, लेकिन सेवा शुरू करने से पहले सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सरकार के अनुसार तीनों कंपनियां फिलहाल लगभग एक ही नियामकीय चरण में हैं।
मस्क ने लगाया 'मोनोपॉली' बचाने का आरोप
मस्क ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कुछ ताकतवर कारोबारी हित स्टारलिंक की एंट्री रोककर 'monopolistic chokehold' बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने किसी व्यक्ति या कंपनी का नाम नहीं लिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब स्टारलिंक भारत में अपनी सेवा शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरियों का इंतजार कर रही है।
भारत में 20 गेटवे साइट तैयार
Starlink की बिजनेस ऑपरेशंस VP लॉरेन ड्रेयर ने India Mobile Congress 2026 में बताया कि कंपनी ने भारत में 20 गेटवे साइट और सैकड़ों एंटीना स्थापित किए हैं। कंपनी के मुताबिक भारतीय यूजर्स का डेटा देश के भीतर रखने और स्थानीय सुरक्षा नियमों के अनुरूप सिस्टम तैयार किए गए हैं। ड्रेयर ने कहा कि कंपनी करीब पांच साल से भारतीय नियामकों और उद्योग के साथ काम कर रही है और सेवा शुरू करने के लिए उसका जमीनी ढांचा तैयार है।
अब असली सवाल यह है कि Starlink को भारत में अंतिम सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम कब मिलता है। सरकार का कहना है कि प्रक्रिया सभी कंपनियों के लिए समान है, जबकि मस्क इसके पीछे कारोबारी हितों के दबाव का आरोप लगा रहे हैं।