उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आरक्षण सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ लखनऊ में पत्रकार वार्ता की। उन्होंने छात्रों की मांगों को ध्यान से सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने और समाधान की दिशा में हरसंभव प्रयास करेगी।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार प्रदेश और देश के युवाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। साथ ही अगले दो दिनों के भीतर छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन भी दिया।
डिप्टी सीएम के मुताबिक, छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से उन्हें एक पत्र भी सौंपा गया है। इस पत्र को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया जाएगा, ताकि छात्रों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर उचित स्तर पर चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद और सकारात्मक पहल के जरिए निकालने की कोशिश की जाएगी।
छात्रों ने बताई आंदोलन की वजह
पत्रकार वार्ता के दौरान छात्र प्रतिनिधि हर्ष दुबे ने कहा कि छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग देश के हर युवा को समान अवसर उपलब्ध कराने की है।
छात्रों का कहना है कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक प्रदर्शन में काफी अंतर देखने को मिलता है। उनका जोर इस बात पर है कि सभी छात्रों की बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि आगे प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश और करियर के दौरान किसी छात्र को अवसरों की कमी के कारण नुकसान न उठाना पड़े।
छात्रों ने प्रोफेशनल कोर्स में अवसर बढ़ाने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि सीटों और अवसरों की संख्या बढ़ाने से अधिक विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और प्रतिस्पर्धा के बीच किसी के साथ अन्याय की स्थिति कम होगी।
दो दिन में केंद्रीय मंत्री से मुलाकात का आश्वासन
छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्हें दो दिनों के भीतर केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया गया है। हर्ष दुबे ने इसके लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का आभार जताया।
अब छात्रों की नजर प्रस्तावित मुलाकात पर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में आरक्षण सुधार, शिक्षा व्यवस्था और प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में अवसर बढ़ाने समेत उनकी प्रमुख मांगों पर चर्चा हो सकती है। सरकार की ओर से भी छात्रों की मांगों को केंद्रीय स्तर तक पहुंचाने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की बात कही गई है।